शनिवार, 27 जनवरी 2024

EK CHIDIYA AUR CHIDE KI KAHANI/ एक चिड़िया और चीडे की कहानी।

 एक चिड़िया और चौड़े में प्रेम हो गया, दोनो ने सोचा की अब हमे शादी कर लेनी चाहिए, दोनो ने शादी कर दी अब वह दोनो एक साथ रहने लगे, चिड़िया ने एक दिन चीडे पूंछा की तुम मुझे छोड़ के उड़ तो नही जावोगे, चीडे ने कहा अगर मैं उड़ गया तो तुम मुझे पकड़ लेना, यह कहके चीडा हसने लगा , पर चिड़िया रूठ गई, चीडे ने कहा की मैं तुम्हे छोड़कर कभी भी नही जावूंगा हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा तुम्हारा खयाल रखूंगा तुम्हारी हर जरूरत पूरी करूंगा , चिड़िया ने कहा इस बात पर मुझे वचन दो की तुम हमेशा मेरे साथ रहोगे , चीडे ने वचन दिया और अपने दोनो पंख काट कर फेंक दिए, और बोला अब तो मैं चाहके भी कही नही जा सकता, तुम्हारे पास हमेशा के लिए रहूंगा। एक दिन जंगल में बहुत भयानक तूफान आया, सभी पक्षी अपनी जान बचाने के लिए उड़ने लगे, चिड़िगा भी चीडे को छोड़ उड़ने लगी और चिड़े से कहा मैं कही छुप जाती हु , चीडे ने कहा तुम तुम अपनी जान बचाओ और अपना खयाल रखना, यह सुनकर चिड़िया जान बचाकर दूसरी जगह चली गई, कुछ देर बाद तूफान थम गया, चिड़िया फिर से वहा अपने चीडे के पास आई तो देखा की चीडा मार चुका था। और वहा एक पेड़ पर लिखा था की, अगर तुम मुझे इतना कहती की मैं तुम्हे छोड़कर कही नही जाऊंगी तो मैं तूफान आने से पहले नही मरता । चिड़िया के आंख में आसू आए उसे बहुत पछतावा हुव,पर अब उसने चीडे को हमेशा हमेशा के लिए खो दिया।

इस कहानी का बोध। प्यार करने और प्यार निभाने में बहुत फर्क है, जो अपनी अंतिम सांस तक प्यार करता है खयाल रखता है वही सच्चा प्रेमी ।

!!धन्यवाद!!

शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

EK SHER AUR KUTTE KI KAHANI/ एक शेर और कुत्ते की कहानी।

 एक बड़ा ही घना जंगल था , एक पालतू कुत्ता रास्ता भटक के जंगल में घूम गया, उसे समझ नही आ रहा था की कहा और किस दिशा में जावू, वह इधर उधर देख रहा था, उतने में उसने देखा की एक शेर उसकी तरफ आ रहा है , कुत्ता बहुत डर गया , कुत्ते ने सोचा की अगर मैं यह से भागा तो शेर पकड़के खा जायेगा , और मुझमें इतनी ताकत नही की मैं शेर से लड़ सकता हु , उसे समझ में नही आ रहा था की क्या करू , उसने देखा की बाजू में कुछ हड्डियां पड़ी है, उसने शेर की तरफ पीठ करके हड्डियां चूसने लगा और जोर जोर से कहता रहा की शेर की शिकार करके आज मजा आ गया, बहुत ही स्वादिष्ट और नरम मांस था शेर का , मुझे तो रोज एक शेर चाहिए , उसकी यह बात सुनकर शेर डर गया और वहां से भाग गया। कुत्ते की जान तो बच गई , पर यह सब पेड़ पर बैठा हुवा बंदर देख रहा था। बंदर ने सोचा यह बहुत चालाक कुत्ता है, बंदर ने सोचा क्यों न मैं इस कुत्ते की चालाकी शेर को बता दू और शेर को अपना मित्र बना दू इससे हम जंगल में बिंधस्त रह सकेंगे । बंदर तुरंत शेर के पास चला गया , और उसने कुत्ते की पूरी चालाकी बता दी। शेर ने कहा चल बंदर मुझे उसके पास ले चल आज मैं उसका शिकार करूंगा , कुत्ता भी बहुत होशियार और समझदार था । उसने देखा की बंदर और शेर दोनो एक साथ आ रहे है , मामला कुछ गडबड लग रहा है , शायद बंदर ने वह सब देख लिया होगा , अब तो मैं गया। कुत्ते को अब ज्यादा डर लगने लगा। कुत्ते ने फिर एक तरकीब निकाली और फिर से उन दोनो के तरफ पीठ करके बैठ गया और जोर जोर से बंदर को गली देने लगा की , उस बंदर ने अभी तक शेर को फसके नही लाया , इतनी देर करदी मुझे बहुत जोर से भूख लगी है, अगर उसने शेर को फसके नही लाया तो मैं आज बंदर को ही खा जवूंगा , उसकी यह बात सुनकर शेर बहुत डर गया , शेर ने बंदर को गली देके वहा से भाग गया। और उस कुत्ते की जान बच गई। कुत्ता रास्ता खोज कर अपने घर पहुंच गया।

इस कहानी का बोध। अगर हमने साहस और अच्छी सूझ बूझ हो तो हम बड़े से बड़े परेशानी , प्रॉम्बलम को दूर कर सकते है। हम हमारी कठिन परिस्थिति में डट के खड़े होकर सामना करेंगे तो अंत में जीत हमारी होगी।

!!धन्यवाद!!


गुरुवार, 11 जनवरी 2024

EK CHIDIYA ,YAMRAJ AUR GARUD KI KAHANI/एक चिड़िया,यमराज और गरुड़ की कहानी

 एक बहुत ही खूबसूरत चिड़िया थी, अपनी सुन्दरतासे उसने जंगल के सारे पक्षियोको मोहित कर दिया था। सभी उसके सुन्दरतकी वाह वाह करते रहते, वह चिड़िया थी भी वैसिही , बहुत शांत और सरल , उसकी मधुर आवाज से सारे पशु पक्षी मोहित हो जाते। एक दिन चिड़िया उड़ते उड़ते यमराज के लोक में पहुंच गई, वहा का अद्भुत सौंदर्य देख कर चिड़िया बहुत प्रभावित हुई , बहुत खुश हो गई वह सब देख के, उतने में वहासे विष्णु का वाहन गरुड़ गुजर रहा था। वह उस सुंदर और अद्भुत चिड़िया को देख कर रुक गया , और उसने चिड़िया से कहा की तुम तो बहुत सुंदर हो , तुम यह क्या कर रही हो, चिड़िया ने कहा मैं तो घूमते घूमते यह आ गई , गरुड़जी ने कहा तुम्हारा यह रहना ठीक नही है तुम जल्दी ही वापस चली जा वो, चिड़िया ने कहा मैं तो रास्ता भूल गई और बहुत थक गई हूं,  गरुड़ को अंदर से डर लग रहा था की कही यमराज यह आ गए तो इस सुंदर जीव के प्राण हर लेगा । गरुड़ ने तुरंत चिड़िया को उठाकर पीठ पर रख कर उड़ाके जंगल में छोड़ के वापस यमराजज के लोक में पहुच गया । यमराज ने गरुड़ से कहा की तुम उस चिड़िया को जंगल क्यों छोड़ आए , गरुड़ जी ने कहा आप के डर से , कही उसे आप देख के प्राण न लेलो, यमराज ने गरुड़ से कहा नही गरुड़ जी मैने उस चिड़िया को आप के पहिले ही देखा था । पर मैं यह सोच रहा था की इसकी मृत्यु तो हजारों मिल  दूर जंगल में होने वाली है, इसे एक साप खाने वाला है, पर इतने जल्दी यह पहुंचेगी कैसे । यमराज की बाते सुनकर गरुड़ के आंख में आसू आए, वह तुरंत उस चिड़िया को बचाने फिरसे जंगल की तरफ जाने लगा , तभी यमराज बोले रूक जाव गरुड़ , वह चिड़िया मार चुकी है, तुमने जहा उसे छोड़ा था वही एक डाली पर बड़ा सा साप था , उसने तुरंत ही उसको खा लिया। यमराज ने गरुड़ को बताया कि मृत्य कभी भी टाली नही जा सकती है, और नियति को न तुम बदल सकते हो ना मैं। हर जीव की मृत्य जहा जब होनी है , वही होके रहती है। तुमने कोई गलत काम नही किया , तुम ने तो उसके प्राण बचाने के लिए ही उसे जंगल में छोड़ आए। इसलिए कर्म गति कभी भी टाली नही जा सकती है। गरुड़ यमराज को प्रणाम करके अपने लोक चला गया।

इस कहानी का बोध। हम कितनी भी कोशिश करले, हम अपनी मृत्यु को नही टाल सकते , नहि उसका समय तय कर सकते है। जो आया है वह जायेगा , इसीलिए जन्म और मृत्यु के बीच का जीवन है उसे हम अगर अच्छे कर्म से बिताएंगे तो हमारी मृत्यु के समय शरीर को ज्यादा तकलीफ नहीं होगी।

!!धन्यवाद!!

गुरुवार, 21 दिसंबर 2023

EK GADHA AUR KUTTE KI KAHANI/एक गधा और कुत्ते की कहानी।

 एक दिन कुत्ते और गधे में दौड़ने की शर्यत लगी, इसका कारण यह था की जो भी जीतेगा वह उस पूरे राज्य का राजा बनेगा, कुत्ता बहुत फुर्तीला , होशियार और समझदार था, और गधा तो गधा था। कुत्ते ने सोचा की यह शर्यत तो मैं ही जीतूंगा गधा मेरे जैसा कहा दौड़ पाएगा। दोनो में सामना शुरू हुवा, कुत्ता तेजी से दौड़ने लगा, रास्ते में उस कुत्ते को कई कुत्तों ने घेर लिया उससे लड़ाई करने लगे जैसे तैसे वह कुत्ता उनसे लड़ झगड़कर आगे बड़ा, फिर कही दूर किसी और जगह और कुछ कुत्तों ने उसे घेर लिया  उसे आगे नहीं जाने दिया वहा भी वह लड़ाई करके आगे बड़ा, बहुत थक गया था , और मार भी बहुत खाया था, रास्ते में उसी तरह कई बार कुत्तों ने उसे रोका। उन सबसे जूझते हुवे वह आखिर वहा पहुंच गया। उसे लगा की मैं जीत गया , जब उसने सिंहासन के तरफ देखा तो गधा सरपे ताज पहन के बैठा था, गधा अब उस देश का राजा बन गया था, और वह होनहार ,हुशार कुत्ता हार गया। कुत्ते के आंख में आसू आए,और सोचा आसू इसलिए नही आए की में हार गया, आंसू इसलिए आए की मुझे अपने ही लोगो ने हराया , अगर वह मुझे नही रोकते तो आज मैं राजा बन जाता और मैं अपने ही लोगो का भला करता, उनकी जरूरत पूरी करता।

इस कहानी का बोध। कभी कभी हमे अपने ही लोग आगे बड़ने नही देते, वे हमे कोसते रहते है की यह तुमसे नही होगा ,तुम इसे मत करो, हमारे मन में निगेटिविटी को भर देते है, जिसके कारण हम आगे नही बढ़ते , हमारे में काबिलियत होने के बावजूद हम वही के वही रहते है। इसीलिए अपनी काबिलियत को पहचानो और आगे बड़ो।

!!धन्यवाद!!



सोमवार, 18 दिसंबर 2023

EK FAKIR KI KAHANI/एक फकीर और फरियादी की कहानी।

 एक दिन एक सरीपुत नाम का आदमी भाग्य और मेहनत में क्या अंतर है , क्या इनकी व्याख्या है , इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए कई मंदिर,  मस्जिद, गुरुद्वारा , कई जगह पर गया पर उसे मन को शांत करने वाला उत्तर नही मिला , फिर किसीने कहा की दूर एक गांव में एक फकीर रहता है, कोई लोग उसे पागल समझते हैं और कोई उनके दर्शन के लिए आते है , तुम उनसे मिलो वही दे सकेंगे तुम्हारे प्रश्न का उत्तर। वह सरिपुत नाम का आदमी उस फकीर से मिलने गया, फकीर मस्त होकर एक कुत्ते के ऊपर सर रखकर सो रहा था, फकीर उठने के कई घंटो बाद सरीपुत ने कहा , भगवन भाग्य और परिश्रम में क्या अंतर है, वह फकीर हसके बोला क्या तुम्हारा अकाउंट किसी बैंक में है , सरीपुत ने कहा हां, हां है, पर यह प्रश्न आप मुझे क्यों पूछ रहे हो, फकीर बोला बस मेरे प्रश्न का उत्तर देते रहो, फिर से इस फकीर ने प्रश्न किया तुमने बैंक के लॉकर में बहुत सारे गहने और पैसे रखे हैं, सरीपुत ने कहा हां रखे है। उसकी चाबी किसके पास है, सरीपुत ने कहा एक चाबी मेरे पास और एक चाबी बैंक मेनेजर के पास, क्या तुम इस चाबी से उस लॉकर को खोल सकोगे , सरीपुत ने कहा नही , मेरी चाबी लगाने के बाद बैंक मेनेजर अपनी रखी हुई चाबी लगता है, दोनो चाबी लगाने के बाद वह लॉकर खुलता है। उसपे उस फकीर ने कहा, मेहनत की चाबी हमारे ही पास रहती हैं, और भाग्य रूपी चाबी भगवान उस परमेश्वर के पास रहती है। तुम मेहनत की चाबी लगाते रहो भगवान भाग्य की चाबी लगाते रहेगा, जबतक तुम मेहनत नही करोगे तबतक भाग्य नही बदलेगा, क्या पता भगवान भाग्य की चाबी लेकर बैठे हो और तुम्हारी मेहनत की चाबी का इंतजार कर रहे है। अब ये तुम्हारे ऊपर है भाग्य को चमकदार बनाना है तो मेहनत करनी पड़ेगी , बिना मेहनत के भाग्य नही बदलेगा। उस फकीर की वह बात सुनकर सरीपुत धन्य हुवा, उसके मन को।शांत करने वाला उत्तर मिल गया। उसने उस फकीर के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और वहा से चला गया। 

इस कहानी का बोध। मेहनत बहुत ही जरूरी होती है, भाग्य को चमकदार बनाना चाहते हो तो मेहनत बहुत जरूरी है। बिना मेहनत के तुम भाग्य नही बदल सकोगे।

!!धन्यवाद!!




शनिवार, 16 दिसंबर 2023

DHAN , GYAN AUR VISHWAS KI KAHANI/धन, ज्ञान और विश्वास की कहानी।

 धन, ज्ञान और विश्वास तीनों बचपन के अच्छे दोस्त थे, तीनो एक साथ घूमते थे खाते थे पीते थे साथ उठाते बैठते थे, उन तीनो में गहरा दोस्ताना था। कुछ सालो बाद वह बड़े हो गए , तीनो की मंजिले अलग थी , अब उन्हे उलग अपनी राह पे चलना था। तीनो ही बहुत दुखी हो गए, की अब हम हमारी मंजिलों पे जा रहे है। हम कभी मिलेंगे या नही कुछ भी पता नही। धन ने दोनो से कहा की हम कहा मिलेंगे । ज्ञान ने कहा मैं मंदिर मज्जित, गुरुद्वार, स्कूल किताबो में मिलूंगा , धन ने कहा मैं अमीरों के घर में मिलूंगा, उन्होंने विश्वास से पूछा की तुम इतने उदास क्यों हो तुम कहा मिलोगे, विश्वास ने कहा मैं एक बार चला गया तो दुबारा नहीं मिलता। फिर कोई भी कितनी भी कोशिश करे मैं दोबारा नही आता।

इस कहानी का बोध। धन गया तो आप फिर से मेहनत करके पा सकते हो, ज्ञान भी आप कही ना कही से अर्जित कर सकते हो, पर यदि विश्वास चला गया तो वह कभी भी लौट के नही आयेगा, इसीलिए जो अपने पर विश्वास करता है, रखता है , उसका विश्वास हमेशा बनाए रखे।

!!धन्यवाद!!



मंगलवार, 12 दिसंबर 2023

EK BAZ KI KAHANI/ एक बाज की कहानी।

 एक बाज की कहानी सुनकर आप भी अपने आप को हर एक कठिन परिस्थिति का सामना करने के लिए तयार करोगे, बाज करीब करीब 70 से 80 साल तक जीता है। पर जब वो 40 साल का हो जाता है , तब वो थोड़ा बूढ़ा हो जाता है, उसके साथ साथ उसके पैर के नाखून बड़ जाते हैं , वे इस तरह से बढ़ते है , की उससे बाज शिकार नही पकड़ सकता , उसकी चोंच भी बड जाति है , और पूरी तरह से टेडी हो जाती है, उसके कारण उसे खाने में भी बहुत तकलीफ होती है, ऐसी हालत में उसे जल्दी ही मौत आने वाली होती है। पर वह हार नही मानता , वह दूर किसी पहाड़ी पर जाता है, और वह अपनी चोंच को पत्थरोपे रगड़ता है, जोर जोर से मरता है, उसे बहुत दर्द और तकलीफ होती है, पर जीने के लिए वह सब सहन करता है, वैसे ही अपने नाखून को भी वैसे ही घिसता है , उसे बहुत पीड़ा , और दर्द होता है, कई बार खून भी निकलता है और वह भूखा ही ये सब वह सेहता रहता है, करीब करीब 6 महीने लग जाते है उसे फिर से पहिले जैसे बननेके लिए, उसके बाद वह फिर से आकाश में लंबी उड़ान भरता है और अपने शिकार को ढूंढता है। उसके बाद करीब करीब 30 साल और जीता है।

इस कहानी का बोध। हम भी कभी कभी निराश और हताश हो जाते हैं, जीने की चाह नही रहती , शरीर में शक्ति नही रहती, हम में बहुत सारी नेगेटिविटी भर जाती, आत्मविश्वास खो जाता है, अगर हम अपनी इच्छा शक्ति को बढ़ाएंगे , अपने माइंड को पॉजिटिव रखेंगे तो आप किसी भी उम्र में संघर्ष करने के लिए और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सदा तत्पर रहोगे। बाज की तरह फिरसे लंबी उड़ान भरोगे।

!!धन्यवाद!!



शुक्रवार, 8 दिसंबर 2023

EK BHED CHARANE VALE BACCHE KI KAHANI/ एक भेड़ चराने वाले बच्चे की कहानी

 एक गांव में एक गरीब परिवार था ,उनका घर खेती करके और भेड़ पालन करके चलता था, उस घर का एक छोटा बच्चा रोज सुबह सुबह भेड़ को लेके चराने जाता था, भेड़ को चराते समय दूर एक पहाड़ी पर सोने जैसा चमकने वाला एक घर दिखता था, जैसे की वो किसी भगवान का घर हो या परियां रहती होगी उसमे, ऐसा वह बच्चा उसे देखके रोज सोचता था। उसकी बहुत इच्छा होती की वहा उस घर में जाए, पर भेड़ चराने के वजह से वो बच्चा वहा नही जा सकता, एक दिन उसके पिताजी बोले आज तुम घर पे रहो में भेड़ को चराने लेके जाता हूं, यह सुनकर बच्चा खुश हुवा, और वो उस सुनहरा घर देखने चला गया, रास्ता बहुत लंबा था, वहा पहुंचते पहुंचते शाम होने लगी, उस घर के अंदर पहुंचा तो उसे उसी उमर का एक बच्चा दिखाई दिया , वह घर एक साधारण गरीब परिवार का था, उस घर की खिड़कियां शीशे की थी, वह देख बच्चा अचरज हुवा, उसने उस बच्चे को कहा मैं नीचे से इस पहाड़ी पर आया हु, मुझे नीचे से यह घर सुनहरा और परियों के घर जैसा दिखता है, इसीलिए में इसे देखने आया हु, उड़ा पहाड़ी वाले बच्चे ने उसे भी कुछ ऐसा ही कहा, मुझे भी यहां से नीचे शाम को ऐसा ही एक घर दिखता है, जो बिलकुल सुनहरा , लाल चमकदार दिखाई देता है, आओ मैं तुम्हे इस खिड़की से दिखाता हूं, उस पहाड़ी वाले बच्चे खिड़की से वह घर दिखाया, वह बच्चा देख के बोला यह तो मेरा घर है, वह घर भी इसी घर जैसा है। दोनो एक दूसरे को देखके हसने लगे , और वे दोनो अच्छे दोस्त भी बन गए।

इस कहानी का बोध। दोस्त हम जब दूसरे को देखते है तो हमे लगता है ये कितना ऐश आरम में रहता होगा, अच्छा job है, गाड़ी है, अच्छी बीवी है। यही सिलसिला एक दूसरे के प्रति होते रहता है। पर ऐसा नहीं है, हर एक के जीवन संघर्ष भरा होता है , कोई अपना दुख दिखाता है कोई नही दिखाता है। इस संसार मैं केवल ज्ञान और दुःख ही हमेशा स्थिर रहेगा, बाकी सब आते जाते रहेंगे।

!!धन्यवाद!!



मंगलवार, 5 दिसंबर 2023

MEHANTI BAAP AUR BETE KI KAHANI/ मेहनती बाप और बेटे की कहानी।

 एक बड़ा ही गरीब परिवार था, उसमे एक बेटा बीवी एक मां और वह खुद, रोज मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पेट वह भरता था , वह अकेला ही कमाता था , पूरा परिवार उसी पर निर्भर था , एक दिन उसके बेटे ने जो करीब चार साल का था अपने पिताजी से कहा की मुझे तुम्हारे साथ खेलना है , बाहर घूमने जाना है तुम मुझे कही भी लेके नही जाते खाली काम और काम की करते रहते हो, पिताजी ने कहा की काम नही करूंगा तो तुम्हारा पेट कैसे भरूंगा काम करना ही पड़ेगा तभी तो मैं तुम्हारे लिए पैसे इकट्ठा करके खिलोने लता हूं खाने के लिए चॉकलेट लता हूं, तुम दिन भर इन खिलोनोसे खेलते रहो और मुझे काम।पर जाने दो , बेटे ने कहा की आप दिन भर काम करके कितना पैसा कमाते हो , उसके पिता ने हंस कर बोला दिन भर में मैं १०० रुपया कमाता हूं, इतना बोल कर वह पिता काम पर चला गया , अगले दिन सुबह सुबह पिता से बोला की मुझे एक रुपया चाहिए, पिता ने कुछ भी नही बोलते हुवे उसके हात में एक रुपया दिया और रोज की तरह काम पे चला गया, अगले दिन फिर एक रुपया मांगा, ऐसा रोज करने लगा , एक दिन पिताजी ने कहा की तुम रोज एक रुपया क्यों मांगते हो उसपे बेटा बोला , ऐसे ही मुझे खिलौना खरीदना है इसीलिए , तीन महीनो के बाद अचानक बेटा बोला पिताजी मुझे आज दस रुपए चाहिए यह सुनकर पिता गुस्से में आ गया , और कहा दस रुपए कितने होते है तुम्हे मालूम है, इतनी मेहनत करके मैं केवल दिन भर में १००रुपया कमाता हूं, तुम्हे मै नही दे सकता और यह आदत ठीक नही है, बेटा जिद्द पे अड़ा रहा और रोने लगा की मुझे चाहिए ही चाहिए नही तो मैं कल घर से भाग जावूंगा, वापस कभी नही अवूंगा , पिता ने कहा कल तुम्हे देता हु। रात को घर आते ही उसने अपने हात आगे बढ़ाए और कहा पहिले मुझे १० रुपए दो फिर अंदर जावो नही तो मैं यही से घर के बाहर निकल जवुगा ऐसा कहके वह रोने लगा पिता को अपने बेटे की यह जिद्द पसंद नही आई फिर भी उसे १० रुपए दिए , बच्चा खुश हुवा, पर उसके पिता बहुत क्रोधित हुवे थे उन्होंने अपना गुस्सा अपने पत्नी पे निकाला , घर का माहोल बहुत ही खराब हो गया था , रात को सोते समय बेटे ने अपने पिता को कहा , मेरे पास कुछ है जो मैं आपको देना चाहता हु, पिता गुस्से में था, बेटे ने एक डिब्बा उन्हे दिया पिता ने उसे खोला तो उसमे कुछ चिल्लर थी, बेटे ने कहा पिताजी इसे गिनो , पिता उसके जिद्द के आगे कुछ न कह सका और उसने गिने तो वह सौ रुपए थे, बेटे को बोला यह सौ रुपए है, बेटा बोला ये आप रखलो, कल का एक दिन तुम्हे मेरे साथ गुजरना होगा, यह सुनकर पिता के आंख में आंसू आ गए उसने अपने बेटे को गले लगाया और सॉरी भी बोला । अगले दिन उन दोनो ने अच्छा समय बिताया , बेटा बहुत खुश हुवा और पिता के स्वभाव में भी थोड़ा बदलाव आया । 

इस कहानी का बोध। पैसों के पीछे भागते भागते हैं हमारे बीवी बच्चे समाज इनको अनदेखा करते है, ऐसा लगता है की पैसों से हम सब कुछ खरीद सकते है, पर ऐसा नहीं है हम सब कुछ खरीद तो सकते है , पर बीता हुआ समय कभी भी नही खरीद सकते है, नही वह कभी वापस आ सकता है। और इंसान का क्या है आज है कल नही कब मौत आयेगी किसको पता है। इसीलिए अपने व्यस्त समय में से कुछ समय अपने बच्चे और बीवी को भी दिया करो ।

!!धन्यवाद!!



शनिवार, 2 दिसंबर 2023

EK MURKH BACCHE KI KAHANI/ एक मूर्ख बच्चे की कहानी।

एक छोटा बच्चा करीब १२ या १३ साल का एक ढाबे पे काम करता था, लोग खाना खाने के बाद उनकी प्लेट उठता था, उनको पानी देता था, इस काम के कुछ पैसे मिलते थे , जिससे वह अपने घर का गुजारा करता था, एक दिन आदमी वहा खाना खाने को आया , खाना खाने के बाद उसने उस बच्चे को ५५० रुपए टीप दी, उस बच्चे ने उसमें से केवल ५० रुपए ही लिए, और ५०० रुपए वैसे ही रखे, उस इंसान ने ५०० रुपए लिए चला गया, दो दिन बाद वह फिर से वही खाना खाने आया , खाना खाने के बाद बिल भरा , और वापस उसने ५५० रुपए टीप रख दी, बच्चे ने फिरसे केवल ५० रुपए ही उठाए और ५०० रुपए वापस रख दिए, इस मूर्ख बच्चे की मूर्खता दिखाने के लिए अब वह आदमी रोज अपने नए दोस्तो को खाना खाने लेके आता, और अंत में वह उस बच्चे की मूर्खता अपने दोस्तो को दिखाता सब उस बच्चे पे हसकर लोकल जाते, यह खेल कई महीनो से चलता रहा। एक दिन उस बच्चे के साथ काम करने वाले लड़के ने कहा की तुम तो सचमुच मूर्ख हो, वह आदमी रोज पांसो और पचास की नोट रखता है, पर तुम केवल पचास की नोट ही उठाते हो, ऐसा क्यों , उसपे उस छोटे बच्चे ने जवाब दिया जिस दिन मैं ५००रूपये की नोट उठाऊंगा उस दिन ये खेल खल्लास हो जायेगा , आज तक मै पचास रुपए उठाकर ५००० हजार बना लिए है, वह आदमी मुझे मूर्ख समझता है , और मेरी मूर्खता को दिखाने के लिए रोज किसी न किसी को यहां खाना खाने लेके आता है। बच्चे की बात सुनकर वह लड़का चुप हो गया और उसने कहा की मूर्ख तो वह आदमी निकला जो रोज ५० रूपये दे जाता है और खाने का बिल भी भरता है। इस बात पे वह दोनो जोर जोर से हसने लगे।

इस कहानी का बोध। जीवन में कभी कभी ऐसा भी समय आता है , जहा समझदारी से नही मूर्ख ता से भी काम चलाना पड़ता है। उस परिस्थिति में हमे अगर मूर्ख बनकर फायदा हो रहा है, तो क्यों न मूर्ख बने। अंत में फायदा तो अपना ही होना है।

!!धन्यवाद!!



 

गुरुवार, 30 नवंबर 2023

BHAGVAN SHRI KRISHNA AUR UTANG RISHI KI KAHANI / भगवान श्री कृष्ण और उतंग ऋषी की कहानी।

  यह कहानी  महाभारत के युद्ध के बाद की है, भगवान श्री कृष्ण जब युद्ध समाप्त होने के बाद जब वह वृंदावन के लिए निकले तब एक घने जंगल में , बदलो के गरजने जैसी आवाज आ रही थी, श्री कृष्ण ने अपने सारथी से कहा की यह आवाज  एक महान तपस्वी के तप का ब्रभाव की है, रथ को उसी दिशा में ले चलो जहा से ये आवाज आ रही है, उनके दर्शन करके जायेंगे, वह दोनो तपस्वी के पास गए , श्री कृष्ण उनके दर्शन करने के लिए रथ से उतरे, तभी उतंग ऋषि ने अपने आंखे खोली और उर उनके मन को विचलित करने वाला प्रश्न किया की महाभारत का युद्ध नही हुवा न , कौरव और पांडव के बीच संबंध अब ठीक हुवे न, एक सांस में उतुंग ऋषि ने कही प्रश्न किए, उसपे भगवान श्री कृष्ण ने कहा की युद्ध हुआ और बड़ा ही भीषण युद्ध हुआ करोड़ों की संख्या में लोग मरे, केवल १० लोग बचे, इससे उतंग ऋषि क्रोधित हुए और श्री कृष्ण से कहा तुम्हारे होते हुवे इतना भीषण युद्ध कैसे हूवा, तुम चाहते तो इसे रोक सकते थे पर तुमने इसको होने दिया, इतनी बड़ी जीव हानि हुई, और तुम चुपचाप देखते रहे , इसीलिए मैं तुम्हे श्राप देता हु। इससे भगवान श्री कृष्ण बोले की रुको मेरी बात सुनो यह केवल युद्ध नही था यह युद्ध धर्म और अधर्म का युद्ध था , अगर ये युद्ध नही होता तो पृथी पर अराजकता फैल जाती, स्त्री यों पर अत्याचार होता, साधु संत को कोई पूजता नही , पशु पक्षी के ऊपर अन्याय होता उनकी हत्या हो जाती , चारो तरफ अन्याय अत्याचार होता अधर्म बढ़ता जाता, इसे रोकने के लिए यह युद्ध अनिवार्य था। मेरे इस अवतार को पहचानो, मुझे पहचानो मैं ही ब्रह्म हूं मैं ही महादेव मैं सारे भूतो में हू, मैं ही नारायण, मैं ही इंद्र मैं धर्म की स्थापना करने के लिए इस धरती पर अवतार लेता हु और अधर्म को मिटाकर धर्म की स्थापना करता हु। मैं काल से परे हूं, मुझे किसी भी प्रकार का श्राप नही लगता , मैं किसी के वश में नहीं आता , मुझसे ही यह संसार चलता है, मुझसे ही तुम्हारी तपस्या सफल होती है, मुझसे ही तुम्हारा श्राप सच सिद्ध होता है, अगर तुमने मुझे शर्म दिया तो जो शक्ति तुमने तप से अर्जित की है वह नष्ट हो जाएगी , तुम्हारा तपोबल शून्य हो जायेगा, यह सुनकर उतंग ऋषि ने भगवान श्री कृष्ण से क्षमा मांगी और अपने विराट दर्शन के लिए प्रार्थना की, भगवान श्री कृष्ण ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और उन्हें अपने विराट रूप के दर्शन दिए।

इस कहानी का बोध। कौरव की ताकत पांडव के मुताबिक बहुत ज्यादा थी, बहुत ही पराक्रमी योद्धा लाखो की सेना थी, और पांडव के पास केवल भगवान श्री कृष्ण थे। केवल भगवान का साथ होने से पांडवो की जीत हो गई, क्यों की पांडवोके कर्म अच्छे थे, और वे धर्म के पक्ष में थे, इसीलिए पांडव जीत गए। हमारा जीवन भी महाभारत के युद्ध जैसा है , अगर हमारा कर्म और हम धर्म को अच्छा और सच्चा रखे तो हमे बड़ी से बड़ी ताकत नही गिरा सकेगी, हम हर मुसीबत में डट के खड़े रह पाएंगे। और कठिनाई असानिसे हल हो जाएगी।

!!धन्यवाद!!



शुक्रवार, 24 नवंबर 2023

DO DOSTO KI KAHANI/ DO दोस्तों की कहानी।

 एक गांव में दो दोस्त रहते थे, वह दोनो बहुत ही गरीब थे उन दोनो ने सोचा क्यों न हम शहर जाकर पैसे कमाए और कुछ अच्छा बिजनेस करे, दोनो ही परिवार की सम्मति से शहर आए, जो भी काम मिला उसे करने लगे , और कुछ नया करने के लिए पैसे इकट्ठा करते लगे , कुछ सालों में ही उनके पास बहुत सारे पैसे जमा हो गए , उन्होंने उस पैसों से अपना खुदका एक बिजनेस शुरू किया , कुछ महीनो मे बिजनेस बड़ा हुवा और उन्हे बहुत फायदा भी हुवा, यह देख एक दोस्त के मन में लालच उत्पन्न हुई, उसने सोचा की अगर मैं इसे मार दु तो यह पूरा बिजनेस मेरा हो जायेगा और मैं पूरा मालिक बन जावुगा, ऐसा सोच कर उसने अपने दूसरे दोस्त को एक्सीडेंट करके मार डाला, सबलोगो ऐसा लगा की यह एक्सीडेंट में मारा गया । फिर वह पहिला दोस्त अब पूरे बिजनेस का अकेला मालिक बना , कुछ महीनो बाद उसकी शादी हो गई, और एक साल में उसे एक बच्चा भी हुवा, बच्चा ३ साल का होने के बाद उसे कुछ बीमारी हो गई, कही महीने वह उस बीमारी का इलाज करने लगा , दो तीन साल बीत गए, पर बच्चा का इलाज नहीं हो पाया, उसके इलाज के लिए उसका पूरा पैसा लग गया , और उसे अपने बच्चे के इलाज के लिए अपना बिजनेस भी बेचना पड़ा, अब वह पहिले जैसा गरीब हो गया , उसका घर , पैसा ,बिजनेस सब चला गया , उसकी हालत भिकारी से बत्तर हो गई। डॉक्टर ने कहा ये बच्चा अब कुछ दिनों में मार जायेगा , ज्यादा से ज्यादा दो या तीन दिन तक जिंदा रहेगा, अखरी दिनों में उसका पिताजी उसके पास बैठा , और अपने बच्चे को देख कर रोने लगा, बच्चे ने आंखे खोली और कहा की अब तुम क्यों रोते हो ये तो होना ही था, मुझे पहचानो मैं तुम्हारा वही दोस्त हू जिसको तुमने एक्सीडेंट में मरवा डाला था, मैं बदला लेने फिर तुम्हारे घर में जन्म लिया , में तुमको वापस उसी हालत में लाया , जहासे हमने शुरवात की थी। अब तुम कभी भी अमीर नही बन पवोगे। इतना बोल के वह बच्चा मर गया। उस दोस्त को बड़ा पछतावा हुवा और वो पागल बन गया और इधर उधर भटक ने लगा ।

इस कहानी का बोध। कर्म सिद्धांत को कोई भी नही बदल सकता है। तुम जितनी तकलीफ दूसरो के लिए खड़ी करोगे उससे कई गुना तकलीफ तुम्हे आने वाले समय में मिलेगी। इसीलिए एक दूसरे की मदत करो किसका सहारा बनो, फिर तुम्हे किसीभी तरह की तकलीफ नहीं होगी, और आने वाली परेशानी और तकलीफ आपका कुछ भी बिगाड़ेगी नही, इसीलिए अपने कर्म को अच्छा बनाए रखे। 

!!धन्यवाद!!



सोमवार, 20 नवंबर 2023

EK VYAPARI AUR MACHVARE KI KAHANI/एक व्यापारी और मछुवारे की कहानी।

 एक व्यापारी का मछली बेचने का धंधा था , और उसके बगल में ही एक मच्छी बेचने वाला रहता था, वह बहुत गरीब था मछली बेचके अपना गुजारा करता था, वह उस व्यापारी से जलता भी था, एक दिन व्यापारी का बेटा बीमार पड़ गया , उसके इलाज का खर्च बहुत ज्यादा था , अपने बच्चे के इलाज के लिए उसे अपना घर , अपना मछली का धंधा बेचना पड़ा , वह बहुत ही गरीब हुवा, यह देख उसके बगल वाला जो मछुवारा था वह हसने लगा , और मन ही मन में बोला , इसको भगवान ने अच्छा सबक सिखाया कितना उड़ रहा था, अब गरीब क्या होता है समझ आये गा, वह व्यापारी अब ऊस मछुवारे के जैसा मछली पकडके सड़क पर बेचने लगा, और अपना गुजारा करने लगा, एक दिन दोनो मछुवारे को बहुत ही ज्यादा और अच्छी मछली मिली , दोनो ने उसे बेच के बहुत पैसा कमाया , पाहिला मछुवारा जो गरीब था , उसने उस पैसों से अच्छे कपड़े खरीदे, बीवी बच्चे के लिए नए कपड़े खरीदे , अच्छा खाना खाया बाहर जाकर , कुछ पैसों से दारू पी लिया, और इस तरह उसने सारे पैसे अपने ऐश और आराम में उड़ा दिए, पर जो दूसरा मछुवारा जो व्यापारी था , उसने कुछ थोड़े पैसे घर पे खर्च किए, जिसकी घरपे अत्याधिक जरूरत थी वही खर्च किए , और बाकी पैसों से , मछली पकड़ने के लिए पैसे देके मछुवारे रखे , और खुद भी मछली पकड़ने लगा , ऐसा कर के उसने कुछ दिनों में ही , वापस पहिले जैसा बड़ा मछली का व्यापारी बना, और बहुत अमीर भी। और जो मछुवारा था वह गरीब के गरीब ही रह गया।

इस कहानी का बोध। हम जोभी जमाते है उसका कुछ हिस्सा अगर हम हमारे धन की वृद्धि में लगाते है , ऐसा करने से हम जल्दी ही अमीर बन जाते है। फिर हम हमारे सारे शौक पूरे कर सकते है। इसके लिए संयम और हिम्मत , मेहनत बहुत जरूरी है।

!! धन्यवाद!!



सोमवार, 13 नवंबर 2023

EK KISAN AUR USAKE CHOR BETE KI KAHANI/एक किसान और उसके चोर बेटे की कहानी।

 एक बूढ़ा किसान था , उसका एक जवान बेटा था। दोनो मिलके खेती करके अपना , गुजारा करते थे। फसल अच्छी होने के कारण आजू बाजू के गांव वाले जलने लगे , एक दिन किसान के बेटे को चोरी के मामले में किसी एक गांव वाले ने फसा दिया उन्होंने पोलिस को कंप्लेन की, पोलिस ने उसे पकड़े के जेल ले गए, चोरी साबित हुई और उस बेकसूर लड़के को कई सालो की सजा हो गई। किसान बूढ़ा होने के कारण खेती नही कर सकता था, जो कुछ उसके पास जमा किया गया था , अब सब खत्म होने लगा , बेटा भी कब जेल से छूटेगा उसे समझ नहीं आ रहा था। उसने अपने बेटे को खत लिखा और कहा, मुजमे अब खेती करने की ताकत नहीं बची, मैं हल नही जोत सकूंगा, मैं तुम्हारी राह कब तक देखू,  अपनी राय दो नही तो मुझे ये खेत बेचना पड़ेगा , तभी मेरा गुजारा होगा। बेटे ने जेल में खत पड़ते ही , पिताजी को जवाब में लिखा की मैने चोरी का धन खेत में गाड़ दिया है। तुम उसे निकलो और अपना गुजारा करो। ऐसा पत्र लिखके उसने दरोगा को दे दिया, दरोगा ने पत्र खोला और पड़ा तो उनको आंके चौक गई, उन्होंने तुरंत सभी पोलिस को लेके खेत उखड़ने लगे , चारो तरफ हल चलाने लगे चोरी का सामान डूंडने के लिए, पर उन्हे कुछ नही मिल पाया। वह खाली हात लौट गई पर पूरा खेत कुछ ही दिनों में खेती के लिए तयार हो गया। बेटे ने फिर एक खत अपने पिताजी को लिख दिया। की, खेत की खुदाई अच्छे से हो गई है, आप अब बीज बो सकते है। पिताजी को लगा की पोलिस वालो ने हमारी मदत को , पिताजी ने बीज बोए और कुछ महीनो बाद फसल बहुत अच्छी हो गई , उस किसान को कई गुना मुनाफा हो गया , वह बहुत खुश हुआ। और गांव वाले फिर से दुखी हुए। पोलिस वालो ने भी उस बेटे की होशहरी की दाद दी गई, और उसे बेगुनाह छोड़ दिया।

इस कहानी का बोध। की काम हमारे बुद्धि से जीवन मैं आए हुवे है हर एक तकलीफ का सामान कर सकते है, हम मिलो दूर से भी अपने बुद्धि से किसी को भी मदत कर सकते है। 

!! धन्यवाद !! 



गुरुवार, 9 नवंबर 2023

EK HIRE KI KAHANI/ एक हीरे की कहानी।

 एक दिन एक महल में एक मां अपने बच्चे के साथ वहा महल की साफ सफाई करने रोज जाति थी, एक दिन उसके बच्चे को एक हीरा मिला , उसने तुरंत अपने मां को बताया , मां ने देखा की यह तो एक हीरा है। उसने अपने बच्चे से कहा यह तो एक कांच का टुकड़ा है, ऐसे कहकर  उस हीरे को बाहर फेंक दिया। और घर जाते समय उसे वहा से उठा लिया, फिर उसने एक सोनार को वह हीरा दिखाया और कहा जरा इसकी कीमत तो बताइए , उस सोनार ने देख कर कहा , यह तो एक कांच का टुकड़ा है, ऐसा कहकर उसे बाहर फेंक दिया, उन मां और बच्चे को भी वह कांच का टुकड़ा लगा, वह वापस घर जाते देखकर उस सोनार ने वह हीरा उठा लिया , और अगले ही दिन वह हीरा लेके वो एक जोहरी के पास गया और कहा की जरा इसकी कीमत तो बताइए, जोहरी ने हीरे को ध्यान से देखा और मन ही मन सोचा यह तो एक नायाब और बैश कीमती हीरा मालूम होता है, उसने उस सोनार को कहा अरे ये तो एक कांच का टुकड़ा है, और बाहर फेंक दिया , हीरा जैसे ही बाहर फेंका वैसे ही टूट के बिखर गया। यह सब घटना एक आदमी देख रहा था, उसने हीरे के पास आके कहा , तुम तो इतने मजबूत हो की तुम कैसे टूट गए , तब हीरे ने उस आदमी को कहा , वह औरत और बच्चा मेरी कीमत नही जानते थे, पर यह जोहरी तो मेरी कीमत जनता था, उसने मेरी कीमत जान के भी मुझे बाहर फेंक दिया, इसीलिए मैं टूटके बिखर गया।

इस कहानी का बोध। कभी कभी हमारे जीवन में भी ऐसी घटना घटती है, की हमारा टैलेंट, हुनर ,को लोग नजर अंदाज करते है, हमारी कीमत नही करते , फिर वह लोग जीवन मैं आगे नहीं बढ़ते , निराश और हताश हो जाते है। हमे एक दूसरे का हुनर और टैलेंट समझ कर उसे उत्साहित और मोटीवेट करना चाहिए, उनका मनोबल बड़ाना चाहिए, तभी हर एक इंसान जीवन में कामयाब और तरक्की करेगा।



!! धन्यवाद!!

रविवार, 5 नवंबर 2023

DO BHAI KI KAHANI/दो भाई की कहाणी।

 एक दिन दो भाई एक साथ समुंदर के किनारे घुमने गये, उतने  में बड़े भाई और छोटे भाई में झगड़ा हुआ, बड़े भाई ने छोटे भाई को एक थप्पड़ मारा, छोटे भाई ने गुस्से में रेत पर लिख दिया की मेरे बड़े भाई ने मुझे मारा, कुछ दिनों बाद दोनो भाई नदी किनारे घूमाने गए , घूमते घूमते उन्होंने सोचा की क्यों न हम इस नदी में नहाले , दोनो जन नदी किनारे नहाने लगे, इतने में छोटे भाई का पैर फिसला और वह पानी में डूबने लगा , बड़े भाई ने वह देख झट से अपने छोटे भाई को बचा लिया , उसे नदी के बाहर लेके आया उसे पूछताछ की , कही तुम्हे चोट तो नही आई, तुम ठीक तो हो , छोटा भाई बोला , तुम साथ हो तो मुझे किसका डर लग सकता है। उतने में छोटे भाई ने पत्थर पे यह लिखा की मेरे बड़े भाई ने आज मेरी जान बचाई , यह देख बड़ा भाई उसे कहने लगा की, उस दिन समुंदर किनारे जब हम घूमने गए और मैंने तुम्हे थप्पड़ मारा था , तब तुमने रेत पे लिखा था , की मेरे बड़े भाई ने मुझे मारा , फिर तुमने आज पत्थर पे क्यों लिखा , इसपे छोटा भाई विवेक पूर्ण उसे बताया कि , रेत पे लिखने से वह कुछ दिनों में मिट जायेगा , और हम भी उसे भूल जाएंगे, और पत्थर पे लिखी यह कभी नहीं मिटेगी , और यह हमेशा याद रहेगी की मुझे मेरे बड़े भाई ने मरते मरते बचाया ,ऐसी चीज अपने पास क्यों रखे जिसे रिश्ते में दरार आए, उसे मिटा देना ही अच्छा है। इससे बड़ा भाई को रिश्ते की कीमत अपने छोटे भाई से मालूम हो गई, इसके बाद दोनो भी हंसते हंसते घर गए।

इस कहानी का बोध। हम जीवन में नेगेटिव चीजे और यादें रखेंगे तो लाइफ बहुत खराब हो जाती है। और ऐसे में अच्छे रिश्ते में दरार आ जाती है। इसीलिए रिश्तों को संभालना बहुत ही जरूरी है। क्या पता किस वक्त कोन मुसीबत में काम आ जाए।

!!धन्यवाद!!



गुरुवार, 2 नवंबर 2023

EK PATI AUR PATNI KI KAHANI/एक पति और पत्नी की कहानी।

 एक दिन एक पति पत्नी साथ एक चिडिया घर में घूमने गए। वहा उन्हे बहुत सारे पक्षी , तरह तरह के फूल दिखे, यह सब देखते देखते वहा बंदर का बड़ा सा बगीचा जैसा घर था , वहा एक बंदर का जोड़ा , बड़े प्यार से खेल रहे थे, यह देख पत्नी अपने पति से बोली की देखो ये  बंदर का जोड़ा कितना खुश है, और कितने प्यार से खेल रहे है। लाइफ होती ऐसी, कोई झगड़ा नहीं न ही कोई डिमांड, मस्त होकर जी रहे है। उसपे पति कुछ भी नही बोला चुप रहा, फिर वह आगे गए उन्हे , एक शेर का पिंजरा दिखा , वहा शेर और शेरनी साथ साथ बाजू में बैठे थे। उन्हे देखके पत्नी बोली , ये कितने उदास बैठे है, शेर और शेरनी एक दूसरे के बाजू मे तो बैठे है पर इन दोनों में प्यार नही दिख रहा है, शेर और शेरनी एक दूसरे के तरफ देख भी नही रहे है। ये दोनो ऐसे बैठे है , जैसे बाजू में कोई बैठा ही नही, अकेले से लग रहे है। पत्नी पति से पूछ रही है ,ऐसा क्यों बैठे है ये दोनो, इससे पति ने कुछ न कहते हुवे कहा, ये पत्थर लेलो और शेरनी के तरफ फेको, पत्नी ने पत्थर लिया और शेरनी के तरफ फेंका , जैसे ही पत्थर शेरनी के तरफ फेंका , शेर गुस्से में उठके दहाड़ने लगा, दौड़के पत्नी के पास आया , यह देख पत्नी डर गई , पर शेरनी वही बैठी रही, जैसे कुछ हुवा ही नही। इसपे पति बोला , इनमें प्यार तुम्हे नजर नही आया पर एक दूसरे के खातिर विश्वास और सुरक्षा तो नजर आई ना, इसे कहते सच्ची मोहब्बत , सच्चा प्यार। अब हम बंदर के पास चलते है, फिर से पति ने अपनी पत्नी को एक पत्थर दिया और कहा, की इसे तुम बंदरिया के तरफ फेंको, जैसे ही पत्नी ने पत्थर बंदरिया के तरफ फेंका , वह देख बंदर झाड़ पे तुरंत अपनी जान बचाके चढ़ गया। इससे पति बोला यह खाली दिखावे वाला प्यार है, इसे खोखला प्यार कहते है, साथ खेल रहे है हस रहे है, इसका मतलब प्यार और सुरक्षा नही होती, यह दुनिया के सामने एक दिखावा है। जैसे ही खराब और कठिन परिस्थिति आई तो बंदर भाग गया । पत्नी को सारी बात समाज आई । उसे अब अपने पति पे ज्यादा विश्वास और भरोसा हुवा, और कही अधिक प्यार भी बड़ा । पत्नी ने मन ही मन भगवान का शूक्रिय अदा करके , अपने पति का हात , पकड़के चलने लगी।

इस कहानी का बोध। जो पति घर में शांत रहता है, गंभीर रहता है, और जराभी रोमांटिक नही रहता , इसका यह अर्थ नही है की उसे अपनी पत्नी की बच्चो की चिंता नही है। बल्कि उसका पूरा ध्यान और मन पत्नी और बचो में ही लगा रहता है। उनकी खुशी और सुरक्षा के खातिर हमेशा तत्पर रहता है। 

!! धन्यवाद!!



बुधवार, 1 नवंबर 2023

EK GUSSEL LADKE KI KAHANI/एक गुस्सैल लड़के की कहानी।

 एक लड़के को बहुत गुस्सा आता था, वह हर किसी से झगड़ता रहता था, घर मे, स्कूल में , बाहर दोस्तो में, सभी लोग उससे परेशान हो गए थे, हर रोज कोई ना कोई उसकी तकरार लेके घर आता था, घर के सभी लोग परेशान हो गए थे, एक दिन उसके पिताजी ने उसे समझाया की इतना गुस्सा ठीक नही है, ना ही तेरे सेहत को नही घर में नही बहार, इतना गुस्सा करने से समाज तुझे अपनाए गा नही, कोई तेरा दोस्त नही बनेगा , जरूरत के समय तुझे कोई मदत नही करेगा, तू ये अपना गुस्सा कम कर दे , उसपे वह बच्चा बोला की मैं क्या करू मुझे गुस्सा ज्यादा आता है, मैं इसे कैसे कम करू आप ही बताए। उसपर उसके पिताजी ने उसे किल की भरी एक थैली दी, और अपने पुराने स्टोर रूम में ले गया , और कहा , जब भी तुम्हे गुस्सा आए तो इस दरवाजे में एक किल ठोक देना , दिन भर में जितनी बार तुझे गुस्सा आए उतनी किल इस दरवाजे में ठोक देना, बच्चे ने पिताजी की बात सुनाली , दिन भर उसे किसी न किसी पे गुस्सा आता ही था , वह घर आके दरवाजे को किल ठोकता जाता, ऐसा रोज करने लगा, धीरे धीरे उसका गुस्सा कम होते गया , अब दिन भर में वह ३ या ४ बार गुस्सा होता, तो दरवाजे पे चार किल ठोकता , ऐसा करते करते वह एक किल पे आ गया, कुछ दिनों बाद वह दिन भर में एक बार भी गुस्सा नही हुवा, उसके ऐसे बर्ताव से सभी प्रभावित हुए, उसे अपनाने लगे , उसे लोगो का घर पर बहुत प्यार मिला , वह बहुत खुश हुवा, उसने अपने पिताजी से कहा की मेरा गुस्सा पूरी तरह खत्म हो गया, यह सुनकर पिताजी खुश हुवे, उसने अपने बच्चे को लेकर फिर से इस स्टोर रूम के दरवाजे के पास ले गया , और उसने दिखाया की इतना बड़ा दरवाजा पूरी तरह से किल से भर गया। उसके पिताजी ने फिर उसे एक चीज करने को कहा, जब भी तुम किसी से अच्छा बर्ताव या मदत करोगे तो तुम इस दरवाजे से किल निकालना , उसने पिताजी की बात मन ली, वह रोज अच्छा बर्ताव और कुछ न कुछ अच्छा करता रहा, घर में मां की काम में मदत करता रहता, ऐसा रोज करता , और रोज वह इस दरवाजे पे लगे किल निकलता , कुछ दिनों बाद दरवाजे के सभी किल निकल गए , और उसके अंदर अब बहुत बड़ा बदलाव भी आया था, वह अपने पिताजी को उस स्टोर रूम के दरवाजे के तरफ ले गया और कहा, मैंने इसके सभी किल निकल दिए , मैं अब पूरी तरह से बदल गया हूं, पिताजी ने कहा बहुत अच्छा । पर तुम इस दरवाजे तरफ देखो , तुम्हारे गुस्से ने इस दरवाजे की क्या हालत करदी, इसमें कितने सारे छेद कर दिए, यह दरवाजा बहुत ही मजबूत और बहुत ही पुराना था , पर तुम्हारे गुस्से के किल ने इसे खराब कर दिया , इसमें हजारों छेद हुए है, अब ये किसी काम का न रहा, और ऐसा दूसरा दरवाजा भी बाजार में नही मिलेगा , उसके पिताजी ने कहा , की हमारा गुस्सा भी ऐसा ही है, न जाने हम कितने दिलो में गुस्से की किल चुभोते है, और वह फिर हमसे दूर चले जाते है। इसीलिए बेटा गुस्सा कभी भी नही करना , जो जैसा करेगा वह वैसा भरेगा । तुम प्यार से सभी को जीत सकते हो पर गुस्से से नही। यह सुनकर बच्चे ने अपने पिताजी से क्षमा मांगी और वे दोनो हंसते हंसते घर लौट गए।

इस कहानी का बोध। गुस्सा बहुत हानिकारक है। गुस्से से हम किसी को जीत नही सकते, हमारा अहंकार ही गुस्सा बनकर बाहर आता है। गुस्से से हम अपनो से बिछड़ सकते है।



रविवार, 29 अक्टूबर 2023

EK SACCHE DOST KI KAHANI/एक सच्चे दोस्त की कहानी।

 दो दोस्त थे , दोनो में गहरी दोस्ती थी, वे जोभी करते एक दूसरे को पूछके करते, साथ घूमाना, साथ खाना , वे दोनो दोस्त कम और भाई ज्यादा लगते, एक दिन एक दोस्त की मां बीमार पड़ गई, वह उसे डॉक्टर के पास ले गया , मां का इलाज तो हो गया था, पर डॉक्टर ने लिखी दवाई लेने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। वह बहुत परेशान हुवा, और उसने अपने दोस्त को फोन लगाया, और कहा भाई मेरे दोस्त तुम कहा, हो मुझे तुम्हारी मदत चाहिए, मेरी मां बीमार है, उसके दवाई लेने के लिए कुछ पैसे चाहिए, वहा से दोस्त बोला की तुम फिक्र मत करो मैं आता हूं, एक घंटे के बाद पहिले दोस्त ने अपने दोस्त को फोन लगाया, तो उसका फोन बंद आ रहा था। वह हैरान हो गया, बार बार उसे फोन कर रहा था, पर उसका फोन बंद ही आ रहा था। उसके मन में अपने दोस्त के लिए  गलत विचार आ रहे थे, एक साथ हम सब कुछ किए , पर आज मैं मुसीबत में हू, और मुझे तेरी जरूरत है, तो तु फोन बंद करके रखा है, बहुत ही गलत सोच अपने दोस्त के खातिर उसके मन में आ रही थी, फिर वह हताश होके किसी और से पैसे मांगने गया , बहुत घुमा , सबके घर गया हात जोड़े , पर किसीने उसे पैसे नही दिए, निराश हो के घर आया तो देखा, मां की दवाई टेबल पर थी , सभी दवाई जो जो उसे चाहिए थी सभी दवाई थी, उसने घर पर पूछा की ये दवाई किसने लाई, घर वाले ने कहा तुम्हारा दोस्त आया था , मां की पर्ची ले गया और दवाई ले आया, यह सुनकर उसके आंखों में आसू आ गए , वह तुरंत उसे मिलने गया , और मिलते ही उसे गले लगाया , सॉरी भी कहा, और बोला मैं तुम्हे कितना फोन कर रहा था , पर तुम्हारा फोन बंद आ रहा था , दूसरा दोस्त बोला की मैने अपना फोन बेच के तुम्हारी मां की दवाई लाई, इसीलिए मेरा फोन नही लग रहा था। वह पहिला दोस्त यह सुनकर रोने लगा उसके आंखों में खुशी के आंसू भी थे , भले मेरे पास कुछ भी नही पर भगवान जैसा दोस्त मेरे पास है। आज मैं दुनिया का सबसे अमीर इंसान हु। यह सुनकर दूसरे दोस्त के आंखों में आंसू आए , दोनो एक दूसरे को गेल लगाकर घर चले गए।

इस कहानी का बोध। आप के पास भले कुछ भी न हो, पर एक ऐसा दोस्त होना जो आपको हर मुसीबत में काम आए, अच्छे वक्त में तो सभी आते है, बुरे वक्त में साथ दे वही सच्चा दोस्त।

     !!धन्यवाद!!



शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

EK PITA AUR PUTRA KI KAHANI/ एक पिता और पुत्र की कहानी

 एक पिता अपने पुत्र से बहुत प्यार करता था , वह अपने पुत्र की हर इच्छा पूरी कर ता था, एक दिन दिन पिताजी थक के घर आते है, घर आते ही वह अपने बेटे के हात में दो सफरचंद देखता  है , वह देख पिता अपने पुत्र से एक सफरचंद की मांग करता है, उसे कहता है की मुझे इसमें से  एक देदो , उतने में बच्चा झट से एक सफरचंद को मुंह में डाल के कुतरता है , यह देख पिता हैरान होता है, वह कुछ बोलने से पहिले ही दूसरा सफरचंद भी मुंह में डाल कर कुतर देता है, यह देख उसके पिताजी के चहरे की मुस्कान गायब हो जाती है, वह हैरान होता है, और सोचने लगता है, की मेरा प्रिय बेटा कैसा बरताव कर रहा है मुझसे , वह बहुत नाराज होता है, उतने में बच्चा झट से पिता से कहता है, पिताजी पिताजी यह सफरचंद आप  खावो ये ज्यादा मीठा है। पिता ये सुनकर बहुत खुश हो जाता है, और अपने बेटे को गले लगाता है। और सोचने लगता है की, मैंने कितने जल्दी मेरे अपने बेटे के बारेमे गलत निर्णय लिया, पर मेरा बेटा तो मुजपे अधिक प्यार करता है, अपने पुत्र का प्रेम देखकर उसके आंख में आसू आते है।

इस कहानी का बोध। बहुत जल्दी हैं किसी चीज का निर्णय लेके उसके पीछे का प्रेम उसकी भावना का विचार नहीं करते , और हम सबसे अधिक प्रेम करने वाले व्यक्ति से दुखी हो जाते है। पर थोड़ी समझदारी थोड़ा सब्र हमे उसके पीछे का प्यार समझ सकते है।

!!धन्यवाद!!



EK CHIDIYA AUR CHIDE KI KAHANI/ एक चिड़िया और चीडे की कहानी।

 एक चिड़िया और चौड़े में प्रेम हो गया, दोनो ने सोचा की अब हमे शादी कर लेनी चाहिए, दोनो ने शादी कर दी अब वह दोनो एक साथ रहने लगे, चिड़िया ने ...