गुरुवार, 19 अक्टूबर 2023

EK CHUHE KI KAHANI/एक चूहे की कहानी

 एक दिन एक चूहे के पीछे साप लग गया, जैसे तैसे अपनी जान बचाकर वह अपने बिल में घुस गया और कई दिन डर के मारे अंदर ही रह गया, उसने कही से यह सुनाता की जंगल में एक महात्मा रहते है, वह उस महात्मा के पास गया और उनसे प्रार्थना करने लगा की मुझे साप से बहुत डर लगता है, वह हमे खा जाता है, क्या आप मुझे खरगोश बना दोगे , जिसके कारण साप मुझे नही खा सकेगा , महात्मा ने कहा ठीक है , तथास्तु , और फिर वह खरगोश हो गया, कुछ दिनो बाद कई मनुष्य खरगोश की शिकार करने जंगल आए , और जो चूहे से खरगोश बना था उसके पीछे लग गए , जैसे तैसे अपनी जान बचाकर वह फिर से उस महात्मा के पास आया और कहा की , साप से तो मैं बच सकता हु पर मनुष्य से नही, कृपया आप मुझे , भेड़िया बनादो, उस साधु ने कहा जैसी तुम्हारी इच्छा, और वह भेड़िया बन गया , भेड़िया बन के जंगल में घूमता रहा , अचानक शेर उसके पीछे लगा , भागते भागते वह थक गया और बच गया , अगले दिन फिर से शेर पीछे लगा फिर वह जान बचाकर भागा, ऐसे ही चलता रहा। फिर उस भेड़िया बने चूहे ने सोचा क्यूं न मै शेर बनू और जंगल में राजा के जैसा घुमु, ये ठीक रहेगा, फिर से वह उस महात्मा के पास आया और कहा , भगवान भेड़िया का जीवन भी दर्द भरा है, रोज नई मुसीबत जान की आफत बनाती है, जीवन मै शांति नही, कृपया आप मुझे, जंगल का राजा शेर बनाइए। वह तपस्वी उसे कहता है जैसी तुम्हारी इच्छा ,तथास्तु, और वह शेर बन जाता है, और जंगल में निडर हो के घूमने लगता है, फिर एक दिन किसी सर्कस के लोग जंगल में शेर को पकड़ के ले जाने आते है, और कई सारे शेर को पकड़ के ले जाते है, ये शेर बना चूहा एक पेड़ के पीछे से देखते रहता है, उसे अब बहुत डर लगता है, वह सोचता है की जंगल के राजा को भी सर्कस वाले गुलाम बनाते है, और सिखाने के लिए बहुत मरते है, और भूखा भी रखते है। वह शेर बना चुका वापस उस महात्मा के पास आता है, और उनसे क्षमा मंगाके कहता है की महाराज आप मुझे फिर से चूहा बना दो , मेरा जीवन मेरे असली रूप में ही सुरक्षित है, फिर वह साधु उसे चूहा बना देता है।

इस कहानी का बोध। इस चूहे ने सभी रूपों में जंगल में रहा यह तक शेर भी बना पर उसमे एक कमी थी वह ये की भले वह शेर बना पर उसका दिमख चूहे का ही था, इसीलिए वह उसी तरह सोचता और उसके अनुसार रहता। हमे भी जीवन में हमारी परिस्थिति के अनुसार अपना व्यवहार और आचरण करना चाहिए, जितना हमारे पास है उतने में ही रहना चाहिए। 

!!धन्यवाद!!



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