शनिवार, 14 अक्टूबर 2023

EK BACCHE KI KAHANI/ एक बच्चे की कहानी

एक दिन एक बच्चे को स्कूल की टीचर बहुत चिल्लाई और उसे कहा की कल अगर तुम स्कूल की फिज नही भर पाए तो स्कूल मत आना , जब तुम्हारे पास स्कूल की फिज भरने के लिए पैसे आए तो साथ में अपने पापा को भी लेकर आना , यह सुनकर बच्चा बहुत उदास और निराश हो उठा , स्कूल से छूटते ही वह समशान घाट चला गया , अपने मरे हुवे पिता के कब्र पर अपना बस्ता फेंक कर रोने लगा, और वह अपने पिता से कह रहा था, की पिताजी उठो कल टीचर ने तुम्हे फिज लेके बुलाया है, नहीतो मुझे स्कूल के अंदर आने नही देंगी नही तो आप मुझे पैसे देदो मैं कल जाके भर दूंगा, उसी समय सामने वाले कब्र पर बैठे एक इंसान ने यह बात सुन ली , वह किसी से कब्र पर कुछ हजार दो हजार की फूलो की चादर बुक कर रहा था, बच्चे की बात सुनकर उसने वह बुक किए हुई चादर कैंसल कर दी , और कहा मुझे याह फूलो की चादर मिल गई, फिर वो आदमी बच्चे के पास गया और कहा , अरे तुम यहां बैठे हो , मैं तुम्हारे स्कूल गया था तुम नही मिले तो यहां आया , तुम्हारे पापा ने तुम्हारे स्कूल की फिज भरने के लिए पैसे भेजे है, वह बच्चा झट से खुश हुआ और मुस्कराने लगा , और उस आदमी से कहा , मेरे पिताजी को थैंक्यू और i love u कहना मेरी तरफ से। यह सुनकर उस आदमी के आंखो में से आसू आए। और उस लड़के को पैसे देके चला गया।

इस कहानी का बोध। हर एक बच्चे का रियल हीरो उसका पिता होता है, उससे बडकर दुनिया में उसका कोई भी नही होता है। और बच्चे मन के सच्चे होते है, उनकी आवाज को तो भगवान को भी सुनना होता है।

!!धन्यवाद!!




 

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